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​​​​​​​​​‘लस्सी का शहर’ कहलाता है यूपी का ये जिला, एक बार चख लिया स्वाद तो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे!

​​​​​​​​​‘लस्सी का शहर’ कहलाता है यूपी का ये जिला, एक बार चख लिया स्वाद तो जिंदगी भर नहीं भूलेंगे!

क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘लस्सी का शहर’ कहा जाता है, ऐसा कहा जाता है कि यहां कि लस्सी का स्वाद इतना खास होता है कि इसे एक बार चखने वाला लंबे समय तक इसका स्वाद नहीं भूलता।

City of Lassi in UP: उत्तर प्रदेश अपनी संस्कृति, खानपान और पारंपरिक स्वाद के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों की अपनी खास पहचान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘लस्सी का शहर’ कहा जाता है? जवाब है वाराणसी, जहां की गाढ़ी, मलाईदार और कुल्हड़ में परोसी जाने वाली पारंपरिक लस्सी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। कहा जाता है कि बनारस की गलियों में मिलने वाली लस्सी का स्वाद इतना खास होता है कि इसे एक बार चखने वाला लंबे समय तक इसका स्वाद नहीं भूलता।

कुल्हड़ में मिलने वाली मलाईदार लस्सी है खास
वाराणसी की पारंपरिक लस्सी अपनी गाढ़ी बनावट और ऊपर जमी मलाई के लिए जानी जाती है। यहां कई दुकानों पर लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है, जो इसके स्वाद और अनुभव को और खास बना देता है। शहर में दशकों पुरानी कई दुकानें आज भी पारंपरिक तरीके से लस्सी तैयार करती हैं। यहां केसर, आम और सूखे मेवों समेत अलग-अलग फ्लेवर की लस्सी भी लोगों को खूब पसंद आती है।

गर्मियों में प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक
लस्सी मुख्य रूप से दही से बनाई जाती है। ठंडी और ताजगी देने वाली यह ड्रिंक गर्मियों में काफी लोकप्रिय रहती है। दही आधारित होने के कारण इसे शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला पारंपरिक पेय माना जाता है। गर्मियों में लोग इसे खाने के साथ या दिन के बीच में ताजगी के लिए पीना पसंद करते हैं। खासतौर पर उत्तर भारत के कई इलाकों में लस्सी गर्मी के मौसम का पसंदीदा पेय है।

पाचन के लिए भी मानी जाती है फायदेमंद
दही में मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माने जाते हैं। लस्सी का सेवन पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके फायदे व्यक्ति की सेहत और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर भी निर्भर करते हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर है लस्सी
दही से बनने वाली लस्सी में कैल्शियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व शरीर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाली मीठी लस्सी में चीनी की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है।

दशकों पुरानी दुकानों में आज भी बरकरार है स्वाद
वाराणसी की पहचान सिर्फ घाटों, मंदिरों और बनारसी संस्कृति तक सीमित नहीं है। यहां का पारंपरिक खानपान भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। लस्सी की कई पुरानी दुकानें आज भी अपने पारंपरिक स्वाद के कारण स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। अगर आप कभी काशी घूमने जाएं, तो यहां की गलियों में मिलने वाली गाढ़ी और मलाईदार कुल्हड़ वाली लस्सी का स्वाद जरूर चख सकते हैं। संभव है कि बनारस की यह मिठास आपको लंबे समय तक याद रहे।

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