Satya Report: सौर उर्जा को सबसे क्लीन फ्यूल माना जाता है, जिसकी वजह से सरकार इसे इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है। घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के बाद यह न सिर्फ आपकी घर के रोजमर्रा के बिजली की खपत की जरूरत को पूरा करता है बल्कि आपके बिजली के बिल को खत्म कर देता है। यहां तक की आप घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, पंप आदि सब चला सकते हैं। हालांकि, कई लोगों को ये शिकायत रहती है कि सोलर पैनल लगाने के बाद भी हर महीने बिजली का बिल क्यों आता है? आइए, हम आपको इसका पूरा गणित समझाते हैं।

सोलर सिस्टम कैसे करता है काम?
सोलर पैनल को आप ऑनग्रिड या फिर ऑफग्रिड दोनों तरीके से लगा सकते हैं। ऑनग्रिड का मतलब है कि आप सोलर पैनल से निकलने वाली बिजली को घर में इस्तेमाल करने के साथसाथ ग्रिड में भी भेज सकते हैं। इस सिस्टम में आपको घर में सोलर पैनल के साथ बैटरी लगाने की जरूरत नहीं होती है। इसके द्वारा पैदा की गई बिजली को आप घर में यूज कर सकते हैं और ज्यादा बिजली बनने पर यह ग्रिड में ट्रांसफर हो जाता है।
ऑफग्रिड सोलर सिस्टम में आपको ग्रिड से कोई मतलब नहीं रहता है। इसमें दिन के समय में आप अपने घर का लोड देने के साथसाथ बैटरी को भी चार्ज करते हैं। रात में इसी बैटरी पर आपके घर की लाइट और पंखें चलेंगे। हालांकि, रात में आपको एसी समेत हैवी लोड वाले अप्लायंसेस चलाने के लिए बिजली कनेक्शन की जरूरत होती है।
सोलर पैनल लगाने के बाद भी क्यों आता है बिल?
सबसे पहले हम बात करते हैं ऑनग्रिड सोलर सिस्टम के बारे में। सोलर पैनल सबसे ज्यादा बिजली दोपहर के समय बनाता है। वहीं, सुबह और शाम के समय बिजली का प्रोडक्शन कम रहता है। ऐसे में घर का लोड अगर लिमिट से ज्यादा हो जाता है, तो आपको ऑन ग्रिड पावर पर निर्भर रहना होगा, जिसकी वजह से बिजली का बिल आता है। वहीं, रात में भी आपको बिजली की खपत के लिए ग्रिड पर निर्भर रहना होगा। हालांकि, अगर आपके घर पर लगा सोलर पैनल ज्यादा बिजली प्रोड्यूस कर रहा है तो एक्स्ट्रा बिजली ग्रिड में सप्लाई होता है। सोलर पैनल ने जितनी एक्स्ट्रा बिजली बनाई है, अगर आप उतना ही खपत करते हैं तो बिजली का बिल न के बराबर आता है।
ग्रिड को दिन के समय एक्स्ट्रा बिजली भेजी जाती है, जिस समय बिजली की दर कम रहती है और आप रात के समय में बिजली की खपत करते हैं, जिस समय बिजली की दर ज्यादा रहती है। इसकी वजह से सामान बिजली इस्तेमाल करने के बाद भी बिजली का बिल आता है। ऐसे में जरूरत न हो तो बिजली की खपत न करें। ऐसा करने से ज्यादा मात्रा में बिजली ग्रिड पर जाएगा और रात के समय में आप इस सरप्लस बिजली से अपने घर के अप्लायंसेज चला सकते हैं।
ऑफग्रिड सोलर सिस्टम में आपको केवल रात के समय बिजली खपत करने पर बिल देना होता है। इसमें आपके पैनल द्वारा बनाया गया सरप्लस बिजली खपत के बाद बैटरी को चार्ज करने में यूज होता है। यह ग्रिड में नहीं जाता है, जिसकी वजह से सरकार से आपको रियायत नहीं मिलती है। ऐसे में आपको केवल हैवी अप्लायंसेज का बिल देना होता है।
कैसे होता है लोड कैल्कुलेशन?
उदाहरण के तौर पर आपके घर पर लगा ऑनग्रिड सोलर पैनल सिस्टम सालाना 8,000 किलोवाट घंटा बिजली पैदा करता है और आपके घर की खपत 10,000 किलोवाट घंटा है, तो आपको 2,000 किलोवाट घंटा बिजली के लिए सालाना बिल का भुगतान करना होगा। सोलर पैनल आपको घर के टोटल लोड का 80% जरूरत पूरी करता है। 20% बिजली के लिए आपको ग्रिड वाले बिजली सप्लाई पर निर्भर रहना पड़ता है।



