
नॉर्वे: सोने में निवेश करके मोटा मुनाफा कमाने की चाहत लोगों को ठगी का शिकार बना रही है। यूरोपीय देश नॉर्वे में ठगी का एक ऐसा तरीका सामने आया है, जिसमें लोगों को पहले सोना खरीदने के लिए तैयार किया जाता है और फिर उसे जंगल या किसी सुनसान जगह पर छोड़ने को कहा जाता है। पीड़ितों को लगता है कि उनका सोना सुरक्षित तरीके से आगे पहुंचाया जाएगा, लेकिन उनके वहां से हटते ही कीमती सामान गायब हो जाता है।
सोने को लंबे समय से निवेश का एक विकल्प माना जाता है। इसी भरोसे और बेहतर रिटर्न की उम्मीद का फायदा उठाकर ठग लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ठग लोगों से संपर्क करके उन्हें सोने में निवेश करने की सलाह देते हैं। वे खुद को सोने के कारोबार से जुड़ा हुआ बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।
पहले सोना खरीदने का लालच, फिर शुरू होता है असली खेल
इस ठगी में सबसे पहले पीड़ित को निवेश और मुनाफे की बातें बताई जाती हैं। जब व्यक्ति उनकी बातों पर भरोसा करके सोना खरीद लेता है, तो उसे उसे किसी अनजान व्यक्ति को सौंपने या तय जगह पर रखने के निर्देश दिए जाते हैं।
कई बार पीड़ित को बताया जाता है कि सोना लेने आने वाला व्यक्ति सीधे नहीं पहुंच सकता। इसके बाद उसे जंगल, पार्क या सड़क के किनारे किसी सुनसान जगह पर सोना रखकर वहां से चले जाने के लिए कहा जाता है। ठग उसे भरोसा दिलाते हैं कि सोना वहां से उठा लिया जाएगा और सुरक्षित तरीके से आगे पहुंचा दिया जाएगा।
लेकिन असल में यह पूरी प्रक्रिया पीड़ित को धोखा देने के लिए रची जाती है। जैसे ही वह सोना रखकर वहां से निकलता है, ठग कीमती सामान लेकर गायब हो जाते हैं। बाद में जब पीड़ित को सच्चाई का पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
ओस्लो और बर्गेन में भी सामने आए मामले
रिपोर्टों के मुताबिक, नॉर्वे में वर्ष 2026 के वसंत के दौरान इस तरह की ठगी के मामले सामने आए। राजधानी ओस्लो और उसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा पश्चिमी तट के शहर बर्गेन में भी ऐसे मामले दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।
नॉर्वे के वित्तीय सेवा क्षेत्र से जुड़ी संस्था फिनांस नॉर्गे (Finans Norge) ने भी इस तरह की धोखाधड़ी को लेकर लोगों को सतर्क किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बुजुर्ग लोगों को भी इस तरह के जाल में फंसाए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, इन घटनाओं में कुल कितने लोग प्रभावित हुए और उन्हें कितनी रकम का नुकसान हुआ, इसका पूरा आंकड़ा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
आखिर ठग लोगों का भरोसा कैसे जीतते हैं?
इस तरह की धोखाधड़ी में ठग सीधे सामान छीनने के बजाय पीड़ित को खुद अपने कीमती सामान से दूर होने के लिए तैयार करते हैं। शुरुआत में निवेश, सुरक्षा और मुनाफे की बातें करके उसका विश्वास जीता जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे ऐसे निर्देश दिए जाते हैं, जिनका पालन करते हुए पीड़ित अपना सोना उनके लिए आसानी से हासिल करने योग्य जगह पर छोड़ देता है।
सोना जैसी महंगी वस्तु को किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर सुनसान जगह पर रखना जोखिम भरा है। जब तक पीड़ित को धोखाधड़ी का संदेह होता है, तब तक ठग वहां से निकल चुके होते हैं। उनकी असली पहचान मालूम न होने पर सामान वापस पाना भी मुश्किल हो सकता है।
एक साल में करोड़ों क्रोनर का नुकसान
नॉर्वे में आर्थिक धोखाधड़ी की समस्या केवल सोने में निवेश तक सीमित नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में धोखाधड़ी के कारण नॉर्वे के बैंकों और उनके ग्राहकों को कुल 96.2 करोड़ नॉर्वेजियन क्रोनर का नुकसान हुआ था।
इसी दौरान बैंकों ने समय रहते कार्रवाई करके ठगी के जरिए होने वाले 3.5 अरब नॉर्वेजियन क्रोनर से अधिक के संभावित नुकसान को रोकने में भी सफलता हासिल की थी। ये आंकड़े बताते हैं कि धोखाधड़ी करने वाले लोग निवेश के लालच से लेकर अलग-अलग तरह के झूठे दावों तक, कई तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
ऐसे लालच से कैसे बचें?
निवेश के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर सोना या दूसरी महंगी वस्तु खरीदने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है। किसी भी व्यक्ति के मुनाफे के वादे को बिना सत्यापन के सच न मानें।
अगर कोई व्यक्ति सोना खरीदने के बाद उसे जंगल, पार्क, सड़क किनारे या किसी दूसरी सुनसान जगह पर छोड़ने के लिए कहता है, तो इसे गंभीर खतरे का संकेत समझें। किसी अजनबी को कीमती सामान न सौंपें और न ही उसके बताए असामान्य निर्देशों का पालन करें।
किसी निवेश कंपनी या योजना की जानकारी उसके आधिकारिक माध्यमों से जांचें। यदि ठगी का संदेह हो, तो संबंधित बैंक और पुलिस को तुरंत सूचना दें।
सत्य रिपोर्ट की सलाह: निवेश में जल्दबाजी और बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करने से बचें। अधिक मुनाफे का वादा करने वाली किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया जानकारी पर आधारित है। घटनाओं और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।



