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AI की असली जंग सिर्फ चिप्स की नहीं, बिजली और डेटा सेंटर की भी; अमेरिका-चीन में बढ़ती टक्कर.

AI की असली जंग सिर्फ चिप्स की नहीं, बिजली और डेटा सेंटर की भी; अमेरिका-चीन में बढ़ती टक्कर.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला अब सिर्फ सबसे स्मार्ट चैटबॉट या सबसे तेज AI चिप बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। इस दौड़ में अब चिप्स के साथ बिजली, डेटा सेंटर, पूंजी, सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर भी अहम हो गया है।

यही वजह है कि आने वाले वर्षों की AI रेस को समझने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि किस देश का मॉडल बेंचमार्क पर आगे है। बड़ा सवाल यह है कि कौन सा देश AI को बड़े पैमाने पर अपनी अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजमर्रा की सेवाओं तक पहुंचा पाता है।

अमेरिका के पास मॉडल और पैसा, चीन तेजी से बना रहा पूरा सिस्टम

कुछ साल पहले तक अमेरिका की AI में बढ़त काफी स्पष्ट दिखाई देती थी। OpenAI, Google, Anthropic, Meta, Microsoft, Amazon और Nvidia जैसी कंपनियों ने अमेरिका को AI मॉडल, चिप्स, क्लाउड और निवेश के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दी।

लेकिन चीन ने इस दूरी को तेजी से कम किया है।

स्टैनफोर्ड AI Index 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में अमेरिकी संस्थानों ने 59 उल्लेखनीय AI मॉडल विकसित किए, जबकि चीन की ओर से ऐसे 35 मॉडल सामने आए। हालांकि मॉडल की संख्या पूरी तस्वीर नहीं बताती।

रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2025 में DeepSeek-R1 ने कुछ परीक्षणों में शीर्ष अमेरिकी मॉडल्स के बराबर प्रदर्शन किया। मार्च 2026 तक प्रमुख अमेरिकी और चीनी मॉडल्स के बीच मापी गई प्रदर्शन दूरी करीब 2.7 प्रतिशत रह गई थी।

यानी AI मॉडल की क्षमता के मामले में दोनों देशों के बीच अंतर काफी कम हुआ है।

AI में अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत पैसा

AI की इस दौड़ में अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत उसका निजी निवेश और टेक इंडस्ट्री है।

2025 में अमेरिका में निजी AI निवेश लगभग 27.30 लाख करोड़ रुपये के बराबर बताया गया, जबकि चीन में यह करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये था। यानी निजी निवेश के आंकड़ों में अमेरिका और चीन के बीच काफी बड़ा अंतर दिखाई देता है।

लेकिन चीन की तस्वीर सिर्फ निजी निवेश से नहीं समझी जा सकती।

स्टैनफोर्ड के मुताबिक 2000 से 2023 के बीच चीनी सरकार से जुड़े फंडों ने AI कंपनियों में अनुमानित 17.57 लाख करोड़ रुपये लगाए थे। सरकारी और औद्योगिक नीति के जरिए होने वाला ऐसा निवेश सामान्य निजी वेंचर कैपिटल के आंकड़ों में पूरी तरह दिखाई नहीं देता।

यहीं से दोनों देशों की रणनीति में बड़ा अंतर सामने आता है।

अमेरिका का मॉडल अलग, चीन की रणनीति अलग

अमेरिका में AI का बड़ा इंजन निजी कंपनियां, निवेश

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